Monday, 21 November 2011

अवुवक्करिन्टे उम्मा 3

अवुवक्करिन्टे उम्मा 4

अवुवक्करिन्टे उम्मा 5

अवुवक्करिन्टे उम्मा 6

Wednesday, 16 November 2011

वापसी


वापसी कहानी का पूर्ण रूप

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Tuesday, 1 November 2011

और एक प्रयास...

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Friday, 28 October 2011

दान की प्रेरणा-रॉकफेलर फौडेशन से संबन्धित एक प्रचलित कहानी


Arrow - Click image to download.(केवल शैक्षिक उपयोग केलिए)
-सधन्यवाद -मेरी दुनिया 
स्वामी विवेकानन्द
यह घटना 1894 और 1896 के समय के बीच की है। उन दिनों स्वामी विवेकानन्द शिकागो की विश्व परिषद में नाम कमाकर दर्शनशास्त्र के महान पंडित और योगी के रूप में सारे अमरीका में प्रसिद्धि पा चुके थे।
रॉकफेलर
श्री रॉकफेलर के मित्रों ने उनसे आग्रह किया कि वे स्वामी जी से मिलें। लेकिन रॉकफेलर में अहंकार और पैसे की अकड थी। सो उन्होने कई बार इस सुझाव को ठुकरा दिया। लेकिन अंत में मित्रों के आग्रह का मान रखते हुए वे शिकागो में स्वामीजी से मिलने पहुंच गये।वहाँ द्वारपाल को बाजू में सरकाते हुए उन्होने कहा, ''मुझे स्वामीसे मिलना है'' और दस्तक दिये बिना ही वे स्वामीजी के कमरे में घुस गये। स्वामीजी कुर्सी पर बैठे कुछ लिख रहे थे। रॉकफेलर को बडा आश्चर्य हुआ कि स्वामी ने न तो कुछ पूछा न ही ऊपर की ओर देखा कि कौन आया है। इससे वे कुछ सहम से गये। शायद उन्हे अपमानित सा लगा और गुस्सा भी आया।